नई दिल्ली: जिन दवाओं की कीमत सरकार तय करती है, फार्मा कंपनियां उनकी संरचना बदलकर उनके दाम नहीं बढ़ा सकतीं। दवा नियामक नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) की अधिसूचना में यह बात कही गई है। एपीपीए ने कहा है कि जिन दवाओं की संरचना समान है, उनमें सरकारी नियमों को मानना पड़ेगा। वहीं, संरचना बदलने पर कंपनियों को दाम बढ़ाने के लिए सरकार की इजाजत लेनी पड़ेगी। देश में 74 बल्क ड्रग- कच्चे माल या फिर इंटरमीडियरीज की कीमतें सरकार तय करती है। नाम न छापने की शर्त पर एनपीपीए के एक अधिकारी ने ईटी को बताया, 'सीलिंग प्राइस को नहीं मानने वाली कंपनियां दवा की जितनी ज्यादा कीमत लेंगी, उनसे वह ब्याज समेत वसूली जाएगी। इस कदम के जरिए नियमों की कमी को दूर करने की कोशिश हो रही है। इससे कंपनियां ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (डीपीसीओ) के नियमों का उल्लंघन नहीं कर पाएंगी।' ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रग्सिट्स (एआईओसीडी) के अजय गुप्ता का कहना है कि इस कदम से रैनबैक्सी, मर्क और सिप्ला जैसी कंपनियां दवा की संरचना में मामूली फेरबदल कर कीमतें नहीं बढ़ा पाएंगी। गुप्ता का कहना है कि मिसाल के लिए मर्क ने विटामिन ई की दवा में फैटी एसिड और व्हीट जर्म ऑयल को बढ़ाकर एविऑन 400 के 10 कैप्सूल वाली स्ट्रिप की कीमत 20 रुपए से बढ़ाकर 60 रुपए कर दी। इसी तरह रैनबैक्सी ने डाइप्रोवेट जी की 20 ग्राम की ट्यूब की कीमत 20 रुपए से बढ़ाकर 60 रुपए कर दी। सिप्ला ने भी एंटी-बायोटिक नोवाक्लॉक्स मं डाइक्लॉक्सीलीन मिलाकर नौ कैप्सूल की कीमत 30 रुपए से बढ़ाकर 49 रुपए कर दी। इंडस्ट्री एक्सपर्ट डॉ. चंद्र मोहन गुलाटी का कहना है, 'किसी भी ड्रग को नए ड्रग की श्रेणी में तब डाला जाता है, जब इसमें नया मॉलिक्यूल हो, नया इंग्रीडिएंट हो।'दवाओं की कीमत बढ़ाने के लिए कंपनियां कई रास्ते चुनती हैं। एनपीपीए के एक अधिकारी का कहना है, 'रेगुलेटरी सिस्टम में अभी भी कई खामियां हैं। कंपनियां कई बार ऐसे इंग्रीडिएंट मिलाती हैं, जो ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट (डीसीए) के तहत नहीं आते और कीमत बढ़ाने के लिए वे फूड एंड सप्लीमेंट एक्ट से लाइसेंस ले लेती हैं।' दवा कंपनियां इस पूरे मामले का विरोध कर रही हैं। उनका कहना है कि इस कदम के जरिए दवाओं की कीमतों पर एकतरफा नियंत्रण की कोशिश हो रही है। छोटी दवा कंपनियां जानना चाहती हैं कि क्या यह शर्त उन पर भी लागू होगी। इसके लिए उन्होंने एनपीपीए के पास अपना प्रतिनिधि भेजा है।
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